डेटा विश्लेषण · आधिकारिक आँकड़े

UP चुनाव नतीजे: 2017 और 2022 का पूरा सीट गणित

यूपी जनमत सर्वेक्षण 2027 · स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग के प्रकाशित आँकड़े

यह समझने के लिए कि 2027 में क्या हो सकता है, पहले पिछले दो चुनावों का गणित देखते हैं। बड़ा संकेत: भाजपा 312 से गिरकर 255 पर, और सपा 47 से बढ़कर 111 पर पहुँची।

एक नज़र में: सीटें

दल / गठबंधन2017 सीटें2022 सीटेंबदलाव
भाजपा (अकेले)312255−57
NDA कुल (सहयोगियों सहित)325+273−52
समाजवादी पार्टी47111+64
बसपा191−18
कांग्रेस72−5
रालोद18+7
अपना दल (सोनेलाल)9*12+3
सुभासपा (ओम प्रकाश राजभर)4*6+2
निषाद पार्टी-6नई

*2017 में अपना दल व सुभासपा भाजपा के साथ (NDA में) रहीं। 2022 में अपना दल NDA में; सुभासपा सपा के साथ। आँकड़े निर्वाचन आयोग के प्रकाशन पर आधारित हैं।

2022 में हुआ क्या था?

2022 के चुनाव में भाजपा 255 सीटें जीतकर अकेले बहुमत से दूर रही, लेकिन सहयोगियों (अपना दल 12, निषाद 6) के साथ 273 बन गई। समाजवादी पार्टी ने सहयोगियों (रालोद 8, सुभासपा 6) के साथ कुल 125 सीटें लीं। अखिलेश यादव ने करहल से जीत दर्ज की। यह नतीजा बताता है कि भाजपा का अकेले का दबदबा घटा, पर गठबंधन कट्टर रहा।

2017 में हुआ क्या था?

2017 में भाजपा 312 सीटों के साथ अकेले ही बहुमत से बहुत आगे थी — यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा विधानसभा बहुमत। सपा 47, बसपा 19 और कांग्रेस 7 सीटों पर सिमट गईं। योगी आदित्यनाथ को उसी साल मुख्यमंत्री बनाया गया।

वोट प्रतिशत की तस्वीर (2022)

दलवोट %
भाजपा41.3%
समाजवादी पार्टी + सहयोगी37.5% (सपा 32%+ थी)
बसपा12.9%
कांग्रेस2.4%

सीटों में बड़ा अंतर दिखने के बाद भी वोट प्रतिशत करीब-करीब था। यह यूपी की फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (जो ज़्यादा जीते, वही सीट) प्रणाली का असर है — मतलब छोटे फ़र्क से सीटों में बड़ा फ़र्क बनता है।

बसपा की गिरावट क्यों खास है?

बसपा 2017 में 19 सीटों व 2012 में 80 सीटों की पार्टी से 2022 में सिर्फ़ 1 सीट पर सिमट गई। भाजपा ने दलित वोटों का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींचा माना जाता है। 2027 में मायावती की भूमिका — अकेले मैदान या किसी के साथ — कई सीटों पर दोनों बड़े खेमों का वोट काट सकती है।

2024 लोकसभा चुनाव का संकेत

2024 लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 में से भाजपा को 33 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन (मुख्यतः सपा) ने 43 सीटें जीतीं। फिर भी 2022 के नतीजे बताते हैं कि लोकसभा-विधानसभा का मूड अलग-अलग हो सकता है — और राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता भाजपा के लिए सबसे बड़ी ताक़त मानी जाती है।

2027 के लिए क्या-क्या संकेत मिल रहे हैं?

यह विश्लेषण केवल पिछले आँकड़ों की तस्वीर है — 2027 का फ़ैसला आपका वोट करेगा। कोई भी बाहरी सर्वे भविष्य की गारंटी नहीं है।

हर सर्वे से बड़ा — आपका जनमत

ऊपर के आँकड़े पिछले हैं। अब बताइए आप 2027 में किसके साथ हैं — योगी या अखिलेश?

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